Thursday, 3 May 2012

EK GHAZAL "AASMAN MEN"

--------------- ग़ज़ल ---------------

बाँहों में भर लो इसको , उड़ो आसमान में।
अफसाना हौसलों का लिखो आसमान में।

बादल - पखेरू दोस्त मिलेंगे उड़ोगे जब, 
दुश्मन मिसाइलों से बचो आसमान में। 

सूरज से भी छिपा के तुम्हारा भविष्य तक, 
तारों ने खुद लिखा है पढ़ो आसमान में।

मेरा ज़मीर , मेरी अना और मेरी खुदी,
किसकी बुलान्दियां हैं कहो आसमान में। 

हम प्यार औ' अमन से सजाएंगे ये ज़मीं ,
ऐलान अब 'नया' ये करो आसमान में।

--वी. सी. राय 'नया'

Wednesday, 2 May 2012

'Zamin Par' Ghazal

------------------ ग़ज़ल -------------------

होते रहे हैं  रद्दोबदल  इस  ज़मींन  पर।   
खंडहर भी बन गए हैं महल इस ज़मींन पर।

परवाज़ पर हो आज, उड़ो   आसमान में ,
आना पड़ेगा लौट के कल इस ज़मींन पर।

मरने के बाद हो कि न हो स्वर्ग और नर्क ,
बोओगे जैसा पाओगे फल इस ज़मींन पर।

इस आज को पकड़ के वसूलो हर-एक पल ,
आएगा ये न लौट के कल   इस ज़मींन पर।    

शीशे सा तेरा दिल है ज़रा साफ़ रख इसे ,
बन जाएगा ये शीशमहल इस ज़मींन पर।

अंजाम इश्क का है जुदाई  यकीन कर ,
बतला रहा है ताजमहल   इस ज़मींन पर।

हमसे कहा गया न 'नया' शेर एक भी ,
आई उतर के खुद ही ग़ज़ल इस ज़मींन पर।
--- वी. सी. राय  'नया'       

Sunday, 15 April 2012

GHAZAL SE HATKAR - NADI

'वर्षा मंगल' में प्रस्तुत है 'जल-चक्र' से प्रेरित छंद मुक्त रचना -
----------------  नदी  -----------------

उदगम  :  जन्म।
मार्ग     :  जीवन।
गंतव्य  :  मृत्यु  ?
नहीं।  सागर विलय।

फिर उसके बाद  ?
उस असीम जलराशि से असंख्य जलकण, सूक्ष्म शरीर धर ,
मेघ का रूप ले, समस्त सृष्टि का उपरिलोकन करते हुए ,
पुनः जलकण बन, वर्षा के रूप में अवतरित हो ,
नदी को जन्म देते हैं, और क्रम चलता रहता है ,
सतत - निरंतर।

उद्देश्य :
प्राणिमात्र की प्यास बुझाना ? हाँ, वह तो है।
कृषि के लिए जल ? हाँ, वह भी है।    
उपजाऊ मिट्टी का परिवहन ? हाँ, वह भी।
वायुमंडल के घुलनशील अवयवों का धरवातरण ? हाँ, वह भी।
खनिज संतुलन ? हाँ, वह भी।
यातायात का साधन ? हाँ, वह भी।
इस प्रकार, अनगिनत "हाँ वह भी"।
इतने सारे उद्देश्य अपने - अपने में चाहे नगण्य प्रतीत हों, किन्तु मिल कर
ठोस उद्देश्य का महासागर ही तो है।

--- वी. सी. राय 'नया'

Wednesday, 4 April 2012

BHARAT KI GHAZAL

चल रही बात पाक भारत की .
शांति कोशिश है साख भारत की .

सारी दुनिया ने मान ली आख़िर ,
न्यूक पॉवर में धाक  भारत की .

न्यूक पॉवर विनाशकारी न हो ,
है नीयत साफ़ - पाक भारत की .

ख़ून इन्सान का कहीं बिखरे ,
करता छाती है चाक भारत की .
 
अपने भाई हैं सारी दुनिया में ,
जड़ पकडती है शाख़ भारत की .

चेहरे खिल के बिखेरते ख़ुशबू ,
जब भी पाते हैं डाक भारत की .

बस के परदेस में 'नया' हसरत ,
काश मिल पाए ख़ाक भारत की .


 

Friday, 16 March 2012

SMILE FROM LANKA

Times Of India of March 16 carries a Middle by Jug Suraiya titled "Smile from Lanka". He is not sure why people of Sri Lanka always smile. I have the answer and am sure of it. India may have the Greatest Cricketer of all times (Sachin Tendulkar), but the Hundredth Hundred could not be made against Sri Lanka.In fact other countries like Australia, West Indies and England also have the same reason to smile a lot.

Bangladesh today allowed Sachin Tendulkar to establish the unbeatable world record but has given a good thrashing to India in today's ODI.

Thursday, 15 March 2012

Ghazal Zara Sa

-------------------- ग़ज़ल ------------------------

तेरी जुल्फों से मेरी साँस महक जाय ज़रा सा। .
मेरी ग़ज़लों में तेरा हुस्न झलक जाय ज़रा सा।

आँख खोलूँ कि करूँ बंद कि दरपन देखूँ ,
मेरी नज़रों में तेरा अक्स चमक जाय ज़रा सा। 

अपनी साँसों को ज़रा रोक के रखना होगा ,
साँस  छूटे तो तेरा परदा सरक जाय ज़रा सा। 

तेरा घर ढूँढता भटका हूँ मैं शहरों शहरों ,
अब तो यह आँख किसी दर पे अटक जाय ज़रा सा।

ज़र्फे मैनोशी  पे मग़रूर 'नया' है कितना ,
इक नज़र डाल इधर वो भी बहक जाय ज़रा सा।

---- वी. सी. राय 'नया'

Tuesday, 28 February 2012

Holi Greetings with a Hazal

--------- होली - हज़ल -----------
इश्क़  में जब दिल बुख़ारी हो गया।
आँसुओं का पम्प जारी हो गया।

उनको दीवानी बनाया फाग ने ,
केस ये तो फ़ौज़दारी हो गया।

उनकी आँखों से चलीं पिचकारियाँ,
मीठा - मीठा प्यार खारी हो गया।

दिल के टुकड़े करके फिर से जोड़ दे,
यार तो पूरा मदारी हो गया।
जिसको दुत्कारा हसीनों ने सदा,
वो बिचारा ब्रह्मचारी हो गया।
बात होली में करो मत होश की ,
रंग का रँग सब पे तारी हो गया। 

क्या करे तारीफ़ उस बुत की 'नया',
जिसने देखा वो पुजारी हो गया।
--- वी. सी. राय 'नया'